संभल में 1857 के काल की ऐतिहासिक बावड़ी मिली, DM ने दी जानकारी

संभल, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के संभल जिले में 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी एक ऐतिहासिक बावड़ी की खोज हुई है। इस बावड़ी की गहराई 250 फीट है और यह ब्रिटिश शासन के समय की एक महत्वपूर्ण धरोहर मानी जा रही है।

जिले के जिलाधिकारी (DM) ने बताया कि इस बावड़ी का ढांचा बेहद रोचक है। उन्होंने कहा, “बावड़ी की ऊपरी मंजिल ईंटों से बनी है, जबकि दूसरी और तीसरी मंजिल संगमरमर से बनाई गई है। इसके अलावा, इस संरचना में चार कमरे और एक कुआं भी है, जो इसकी ऐतिहासिक और वास्तुशिल्पीय महत्वता को और बढ़ाते हैं।”

चंदौसी के लक्ष्मनगंज क्षेत्र में 125 से 150 साल पुरानी ऐतिहासिक बावड़ी का हुआ खुलासा

चंदौसी, 23 दिसंबर 2024: चंदौसी के लक्ष्मनगंज क्षेत्र में 125 से 150 साल पुरानी और 400 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैली एक ऐतिहासिक बावड़ी का खुलासा हुआ है। अधिकारियों के मुताबिक, सोमवार सुबह नगर पालिका द्वारा मैन्युअल श्रम के जरिए खुदाई का कार्य जारी रखा गया, जब जेसीबी मशीन आगे नहीं बढ़ पा रही थी। स्थानीय मजदूरों ने इस खुदाई का काम संभाला, जिसके परिणामस्वरूप यह ऐतिहासिक बावड़ी सामने आई।

खुदाई का काम शनिवार से शुरू हुआ

चंदौसी नगर पालिका के कार्यकारी अधिकारी कृष्ण कुमार सोनकर ने बताया कि खुदाई का कार्य शनिवार को शुरू किया गया था। इस खुदाई का यह नया खोज 13 दिसंबर को संभल में 46 साल बाद पुनः खोले गए भस्म शंकर मंदिर के बाद हो रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, मंदिर की बावड़ी में दो क्षतिग्रस्त मूर्तियां भी मिली थीं, जिन्हें मंदिर के कुएं से निकाला गया था।

बावड़ी का ऐतिहासिक महत्व

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह बावड़ी बिलारी के राजा के मामा द्वारा बनवायी गई थी। माना जा रहा है कि यह बावड़ी उस समय के स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण है और यह चंदौसी क्षेत्र के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को उजागर करने वाली महत्वपूर्ण खोज है। बावड़ी के अंदर की संरचना और पुराने निर्माण कार्य से यह स्पष्ट होता है कि यह स्थान किसी समय जल संरक्षण और सामाजिक उपयोग के लिए महत्वपूर्ण था।

नगर पालिका की ऐतिहासिक कार्रवाई

नगर पालिका अधिकारियों ने बताया कि यह खोज एक अवैध कब्जा हटाने के अभियान के दौरान हुई। इस अभियान के तहत इलाके में हो रही खुदाई के दौरान इस बावड़ी का पता चला, जो अब एक ऐतिहासिक स्थल के रूप में महत्वपूर्ण बन गया है। स्थानीय प्रशासन इस संरचना को संरक्षित करने और पर्यटकों के लिए खोलने के बारे में विचार कर रहा है।

इस बावड़ी के खुलासे से न केवल चंदौसी के लोगों को गर्व महसूस हो रहा है, बल्कि यह क्षेत्र के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को भी उजागर करता है। अब प्रशासन इस स्थल के संरक्षण और अध्ययन के लिए आगामी कदम उठाने की योजना बना रहा है।

— रिपोर्टिंग VIJAY KUMAR

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