काठमांडू: नेपाल के आम चुनाव 2026 के नतीजे देश की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत दे रहे हैं। शुरुआती रुझानों और मतगणना के ताजा आंकड़ों के अनुसार, Rastriya Swatantra Party (आरएसपी) को भारी बढ़त मिलती दिखाई दे रही है। पार्टी के नेता Balen Shah की लोकप्रियता के कारण कई निर्वाचन क्षेत्रों में आरएसपी आगे चल रही है।
मतगणना के नवीनतम रुझानों में आरएसपी करीब 101 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि पूर्व प्रधानमंत्री KP Sharma Oli की पार्टी Communist Party of Nepal Unified Marxist Leninist (सीपीएन-यूएमएल) अपेक्षा से कम प्रदर्शन करती दिखाई दे रही है।
नेपाल के राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह रुझान परिणामों में बदल जाता है, तो देश में नई राजनीतिक व्यवस्था और नेतृत्व उभर सकता है।
- Nepal Flood Disaster: Death Toll Rises to 353 as Newly Formed Lake Threatens to Burst
- Kriti Sanon Raksha Bandhan Ad Controversy: GIVA Withdraws Advertisement After Social Media Backlash
- Maharashtra Marathi Language Drive: 1.5 Lakh Drivers Learn Marathi, 7,750 Fail Test and Must Reappear | Auto, Taxi and App-Based Cab Drivers Asked to Learn Marathi in Maharashtra
- LPG संकट के बीच क्या भारत में लगेगा लॉकडाउन? मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने अफवाहों को बताया झूठा
- बैंक खातों पर मनमानी फ्रीज़ पर रोक: कोर्ट के सख्त निर्देश, नागरिकों के अधिकारों की बड़ी जीत
युवाओं के समर्थन से उभरे बालेन शाह
नेपाल की राजनीति में Balen Shah का उदय हाल के वर्षों की सबसे बड़ी राजनीतिक घटनाओं में से एक माना जा रहा है।
बालेन शाह मूल रूप से एक रैपर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर रहे हैं। उन्होंने राजनीति में आने से पहले ही युवाओं के बीच बड़ी पहचान बना ली थी। भ्रष्टाचार के खिलाफ खुलकर बोलना, पारंपरिक राजनीतिक दलों की आलोचना करना और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से युवाओं तक पहुंच बनाना उनकी लोकप्रियता का मुख्य कारण रहा है।
यही कारण है कि उनकी पार्टी को अक्सर “Gen Z समर्थित राजनीतिक आंदोलन” कहा जाता है। नेपाल के शहरी युवाओं, छात्रों और नए मतदाताओं ने इस चुनाव में बड़ी संख्या में भाग लिया और आरएसपी को मजबूत समर्थन दिया।
नेपाल में किस तरह हो रहे हैं चुनाव
नेपाल की संसद के निचले सदन, जिसे हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स कहा जाता है, में कुल 275 सीटें हैं।
इन सीटों को दो अलग-अलग चुनावी प्रणालियों के माध्यम से भरा जाता है:
- 165 सीटें प्रत्यक्ष चुनाव (First-Past-The-Post) प्रणाली से
- 110 सीटें आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली से
मतदाता चुनाव के दिन दो वोट डालते हैं। पहला वोट अपने क्षेत्र के उम्मीदवार के लिए और दूसरा किसी राजनीतिक पार्टी के लिए।
प्रत्यक्ष चुनाव की सीटों की मतगणना पहले की जाती है। इसके बाद पार्टियों को मिले कुल वोटों के आधार पर आनुपातिक प्रतिनिधित्व की सीटें बांटी जाती हैं।
किस पार्टी को कितनी बढ़त
ताजा रुझानों के अनुसार:
- Rastriya Swatantra Party (RSP) – लगभग 101 सीटों पर बढ़त
- Nepali Congress – करीब 10 सीटों पर बढ़त
- Communist Party of Nepal Unified Marxist Leninist – करीब 10 सीटों पर बढ़त
- Nepal Communist Party – करीब 8 सीटों पर बढ़त
इन रुझानों से साफ संकेत मिल रहा है कि इस बार नेपाल की राजनीति में नए नेतृत्व को बड़ी भूमिका मिल सकती है।
प्रधानमंत्री बनने के लिए कितनी सीटें जरूरी
नेपाल में सरकार बनाने के लिए किसी पार्टी या गठबंधन को संसद में कम से कम 138 सीटों का बहुमत चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर आरएसपी इस जादुई आंकड़े के करीब पहुंच जाती है या अन्य दलों का समर्थन हासिल कर लेती है, तो Balen Shah के प्रधानमंत्री बनने की संभावना मजबूत हो सकती है।
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शाह सत्ता में आते हैं, तो वे तकनीकी विशेषज्ञों और युवा नेताओं को शामिल करते हुए नई तरह की कैबिनेट बना सकते हैं।
काठमांडू की अहम सीटों पर जीत
चुनाव में आरएसपी के कई उम्मीदवारों ने महत्वपूर्ण सीटों पर जीत दर्ज की है।
काठमांडू-1 से पार्टी की उम्मीदवार Ranju Neupane ने संसदीय सीट जीत ली है।
वहीं काठमांडू-6 सीट से आरएसपी के उम्मीदवार Shishir Khanal ने दूसरी बार संसद में प्रवेश किया है।
शिशिर खानाल को लगभग 27,719 वोट मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी Krishna Baniya Chhetri को करीब 6,647 वोट मिले।
सीपीएन-यूएमएल के उम्मीदवार Aman Kumar Maskey तीसरे स्थान पर रहे।
60 प्रतिशत मतदान, युवाओं की बड़ी भागीदारी
नेपाल चुनाव आयोग के अनुसार इस चुनाव में लगभग 60 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।
इस बार खास बात यह रही कि बड़ी संख्या में युवा मतदाता मतदान के लिए बाहर आए। चुनाव अधिकारियों के अनुसार युवाओं की भागीदारी ने चुनाव में नई ऊर्जा और उत्साह पैदा किया।
नेपाल चुनाव आयोग के अधिकारियों ने बताया कि चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ और इसके लिए राजनीतिक दलों, सुरक्षा एजेंसियों और मतदाताओं का सहयोग महत्वपूर्ण रहा।
पहाड़ी जिलों में मतपेटियां पहुंचाने में मुश्किल
नेपाल के कुछ दूरस्थ पहाड़ी जिलों में मौसम की खराब स्थिति के कारण मतपेटियों को पहुंचाने में दिक्कतें आईं।
रिपोर्टों के अनुसार सांखुवासभा, डोल्पा और गोरखा जिलों में मतपेटियों के परिवहन में देरी हुई।
चुनाव आयोग ने इन क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर के जरिए मतपेटियां पहुंचाने की योजना बनाई थी, लेकिन खराब मौसम के कारण इसमें बाधा आई।
Gen Z आंदोलन के बाद पहला चुनाव
नेपाल का यह चुनाव खास इसलिए भी है क्योंकि यह 2025 में हुए बड़े युवा आंदोलन के बाद पहला आम चुनाव है।
2025 में हजारों युवाओं ने भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और कमजोर अर्थव्यवस्था के खिलाफ सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया था।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध और बढ़ती महंगाई ने भी युवाओं में नाराजगी को बढ़ाया।
इन प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं, जिनमें कई लोगों की मौत हो गई। इस घटना ने नेपाल की राजनीति को झकझोर कर रख दिया।
नेपाल में राजनीतिक संकट और अंतरिम सरकार
प्रदर्शनों और राजनीतिक दबाव के बाद उस समय के प्रधानमंत्री KP Sharma Oli को इस्तीफा देना पड़ा।
इसके बाद नेपाल के इतिहास में पहली बार पूर्व मुख्य न्यायाधीश Sushila Karki को अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई।
यह नेपाल के इतिहास में एक ऐतिहासिक घटना थी, क्योंकि वे देश की पहली महिला अंतरिम प्रधानमंत्री बनीं।
युवा उम्मीदवारों की चुनौती
इस चुनाव में एक और दिलचस्प पहलू सामने आया है। बड़ी संख्या में युवा उम्मीदवारों ने चुनाव मैदान में उतरकर दशकों से राजनीति में सक्रिय वरिष्ठ नेताओं को चुनौती दी।
इन युवा नेताओं ने बेरोजगारी, आर्थिक सुधार और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को अपनी चुनावी मुहिम का केंद्र बनाया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह चुनाव नेपाल की राजनीति में पीढ़ीगत बदलाव का संकेत भी हो सकता है।
आगे क्या होगा
मतगणना अभी जारी है और अंतिम परिणाम आने में कुछ समय लग सकता है।
हालांकि शुरुआती रुझान यह संकेत दे रहे हैं कि नेपाल में नई राजनीतिक दिशा उभर सकती है।
यदि Balen Shah की पार्टी बहुमत के करीब पहुंचती है या अन्य दलों का समर्थन हासिल कर लेती है, तो देश में एक नई सरकार बन सकती है जो युवाओं की आकांक्षाओं और आर्थिक सुधारों को प्राथमिकता देगी।
नेपाल के लिए यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का सवाल नहीं है, बल्कि यह तय करेगा कि देश आने वाले वर्षों में किस दिशा में आगे बढ़ेगा।
1️⃣ Kerala Story 2 Controversy: Makers Decline Screening of Film to Kerala High Court
2️⃣ The Kerala Story 2 Row: Film Makers Refuse Court Screening During Kerala High Court Hearing
3️⃣ Kerala High Court Hearing on The Kerala Story 2: Makers Decline to Show Film
4️⃣ The Kerala Story 2 Controversy Deepens as Makers Refuse Screening in Kerala High Court
5️⃣ Kerala Story 2 Legal Battle: Producers Decline Court Screening Amid Teaser Controversy
