📰 मुंबई-अहमदाबाद हाईवे पर MNS की सख्ती: गुजराती साइनबोर्ड हटाए, मराठी में बोर्ड लगाने की चेतावनी
मुंबई: महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) एक बार फिर मराठी भाषा के मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाते हुए सुर्खियों में है। पार्टी पर आरोप है कि वह मराठी भाषा के नाम पर हिंदी भाषी समुदायों को लगातार निशाना बना रही है। ताजा घटनाक्रम में, मुंबई-अहमदाबाद हाईवे पर स्थित रेस्टोरेंट्स और होटलों को मराठी में साइनबोर्ड और मेन्यू लगाने का आदेश दिया गया है। आदेश न मानने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई है।
MNS कार्यकर्ताओं ने हाईवे पर स्थित कई रेस्टोरेंट्स और होटलों का दौरा किया और जिन बोर्डों पर हिंदी, गुजराती या अंग्रेजी भाषा में नाम लिखे थे, उन्हें हटाया या क्षतिग्रस्त कर दिया। गुजराती भाषा में लिखे गए बोर्डों को विशेष रूप से निशाना बनाया गया।
MNS की चेतावनी: ‘मराठी नहीं तो व्यापार नहीं’
वसई में एमएनएस के कार्यकर्ता प्रशांत खंबे ने कहा, “पार्टी प्रमुख राज ठाकरे का स्पष्ट निर्देश है कि मराठी और महाराष्ट्र के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं होगा।” पालघर और ठाणे में पार्टी के नेता अविनाश जाधव ने भी दोहराया कि महाराष्ट्र में व्यापार करना है तो साइनबोर्ड मराठी में लगाना होगा, अन्यथा कार्रवाई झेलने के लिए तैयार रहें।
🔴 गुजरात के विधायक के कार्यालय से भी हटवाया गया साइनबोर्ड
बीते सोमवार को, नवी मुंबई के सीवुड्स इलाके में स्थित गुजरात भाजपा विधायक वीरेंद्र सिंह बहादुर सिंह जडेजा के जनसंपर्क कार्यालय से गुजराती भाषा में लगा साइनबोर्ड MNS कार्यकर्ताओं द्वारा हटवाया गया। यह कार्रवाई पुलिस की मौजूदगी में की गई। विधायक जडेजा गुजरात के रापर विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित हैं। एमएनएस ने इससे पहले बोर्ड हटाने की अंतिम चेतावनी दी थी।
⚖️ राज ठाकरे पर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका खारिज
इस बीच, सुप्रीम कोर्ट में राज ठाकरे के भाषणों को लेकर दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई हुई, जिसमें उन पर महाराष्ट्र में भाषाई विवाद भड़काने का आरोप था। लेकिन जस्टिस बीवी नागरत्ना और केवी विश्वनाथन की पीठ ने इस याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सलाह दी कि वह बॉम्बे हाई कोर्ट में अपनी बात रख सकता है।
