भारत में मानसून का कहर: IMD ने भारी बारिश के लिए रेड अलर्ट जारी किया, पहाड़ों से लेकर मैदान और तटीय इलाकों तक खतरा

नई दिल्ली, 2 सितंबर 2025 – भारत में मानसून का व्यापक प्रभाव देखने को मिल रहा है। उत्तर से पश्चिम और पर्वतीय इलाकों से लेकर तटवर्ती क्षेत्रों तक, भारी बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने छह राज्यों में भारी से अति भारी बारिश को लेकर रेड अलर्ट जारी किया है।

दिल्ली से मुंबई तक, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार बारिश के कारण सामान्य जनजीवन बाधित हुआ है। मौसम विभाग ने आगामी दिनों में भी राहत की कोई संभावना नहीं जताई है। बारिश का यह सिलसिला पूरे सप्ताह जारी रह सकता है।

दिल्ली-एनसीआर में जलभराव और ट्रैफिक जाम

सोमवार को दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम में दिनभर हुई बारिश के कारण सड़कें जलमग्न हो गईं। दफ्तर जाने वाले लोग घंटों ट्रैफिक में फंसे रहे। जलभराव ने आपात सेवाओं को भी प्रभावित किया।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, यह बारिश सक्रिय मानसून और पश्चिमी विक्षोभ के असामान्य प्रभाव का नतीजा है। 5 सितंबर तक दिल्ली-एनसीआर में रुक-रुक कर बारिश जारी रहने की संभावना है।

सोमवार को दिल्ली का अधिकतम तापमान 30.8°C रहा, जो सामान्य से करीब 4 डिग्री कम था, जबकि न्यूनतम तापमान 23.7°C दर्ज किया गया। मंगलवार को तापमान 31°C और 22°C के आसपास रहने की संभावना है।

हिमालयी राज्यों में हालात गंभीर

हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में मौसम बेहद खतरनाक हो गया है। दक्षिणी हिमाचल में रेड अलर्ट और उत्तराखंड के कई हिस्सों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। भूस्खलन और नदियों के अचानक उफान का खतरा बना हुआ है।

पिछले 24 घंटों में हिमाचल, उत्तराखंड, पंजाब, पश्चिमी राजस्थान और तेलंगाना में 21 सेमी से अधिक बारिश दर्ज की गई। हरियाणा, चंडीगढ़, उत्तर प्रदेश और पूर्वी राजस्थान में भी भारी से अति भारी बारिश हुई है।

पश्चिम और मध्य भारत पर भी खतरे के बादल

गुजरात, कोंकण-गोवा, तटीय कर्नाटक और मध्य महाराष्ट्र में 3 से 6 सितंबर तक भारी बारिश का पूर्वानुमान है। 4 और 5 सितंबर को सौराष्ट्र-कच्छ और पहाड़ी इलाकों में अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो सकता है।

छत्तीसगढ़, विदर्भ और पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी इसी अवधि के लिए बारिश की चेतावनी जारी की गई है।

नई वेदर सिस्टम से बढ़ेगा खतरा

बंगाल की खाड़ी में एक नए कम दबाव के क्षेत्र के बनने की संभावना है। इसके साथ ही चक्रवाती परिसंचरण और राजस्थान से ओडिशा-झारखंड तक फैली ट्रफ लाइन के कारण बारिश का दायरा और अधिक विस्तृत होने की आशंका है।

पूर्वोत्तर और पूर्व भारत में भी बारिश का अनुमान

असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 2 सितंबर से लगातार भारी बारिश का अनुमान है। साथ ही ओडिशा, छत्तीसगढ़, विदर्भ और पश्चिम बंगाल में भी व्यापक वर्षा की भविष्यवाणी की गई है।

जनता को सतर्क रहने की सलाह

मौसम विभाग ने फ्लैश फ्लड्स, भूस्खलन, जलभराव और दृश्यता में कमी जैसे खतरों को देखते हुए अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है। निचले इलाके और ढलान वाले क्षेत्र विशेष रूप से जोखिम में हैं। खराब सड़कों, कच्चे रास्तों और खेतों में खड़ी फसलें नुकसान की चपेट में आ सकती हैं।

मौसम विभाग ने स्थानीय चेतावनियों और अपडेट्स पर नजर बनाए रखने की अपील की है। कृषि के लिए जरूरी मानसून, हर साल शहरी ढांचे और आपदा प्रबंधन प्रणाली की परीक्षा लेता है।

इस बार भी, राहत मिलने से पहले बारिश की तीव्रता और बढ़ने की संभावना है।

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