🇺🇸🇮🇳 ट्रंप ने भारत पर 50% टैरिफ लगाया, रूसी तेल खरीद पर 25% अतिरिक्त शुल्क; जयशंकर ने दी प्रतिक्रिया
न्यूयॉर्क, 23 अगस्त 2025:
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत आयात शुल्क (टैरिफ) लागू कर दिया है, और इसके साथ ही रूस से तेल खरीदने को लेकर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क भी जोड़ दिया गया है। यह कदम भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में तनाव को और बढ़ा सकता है।
भारत सरकार की ओर से इस पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि रूसी तेल खरीद को लेकर अमेरिका से पहले कोई बातचीत नहीं हुई थी, और ट्रंप की यह घोषणा अचानक और सार्वजनिक रूप से की गई।
“इतनी सार्वजनिक विदेश नीति पहले किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने नहीं अपनाई”
इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम 2025 में बोलते हुए जयशंकर ने ट्रंप की कूटनीतिक शैली को “असाधारण रूप से सार्वजनिक” बताया।
“हमने अब तक ऐसा कोई अमेरिकी राष्ट्रपति नहीं देखा जो विदेश नीति को इतनी सार्वजनिक रूप से चलाता हो। यह न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक नई स्थिति है,” उन्होंने कहा।
जयशंकर ने यह भी बताया कि ट्रंप अक्सर अपनी नीति की पहली घोषणा जनता के सामने करते हैं, न कि संबंधित देशों को पहले से सूचित करके।
“अक्सर पहली घोषणा सार्वजनिक रूप से होती है — यह एक असामान्य बात है। पूरी दुनिया इस नई शैली का सामना कर रही है,” उन्होंने जोड़ा।
🔑 जयशंकर ने तीन प्रमुख मुद्दों पर डाला प्रकाश:
1. व्यापार वार्ता अब भी जारी
जयशंकर ने साफ किया कि भारत-अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता बंद नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि भारत की कुछ लाल रेखाएं (red lines) हैं — खासकर किसानों और छोटे उत्पादकों के हितों को लेकर।
“वार्ता अभी भी जारी है। ऐसा नहीं है कि बातचीत टूट गई है… हमारी प्राथमिकता हमारे किसानों और छोटे उत्पादकों के हितों की रक्षा करना है।”
2. रूसी तेल मुद्दे पर भारत को निशाना बनाना अनुचित
ट्रंप के 25% अतिरिक्त टैरिफ की वजह रूसी तेल की खरीद बताई गई है, लेकिन जयशंकर ने इसे दोहरे मापदंड (double standards) करार दिया। उन्होंने कहा कि चीन (दुनिया का सबसे बड़ा तेल आयातक) और यूरोपीय संघ (सबसे बड़ा ऊर्जा आयातक) को ऐसे निशाना नहीं बनाया गया।
उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेन्ट ने भारत की तेल खरीद में प्रतिशत वृद्धि का हवाला दिया था, लेकिन उन्होंने कहा कि अन्य देश ईरान से तेल खरीद कर रहे हैं, जो अमेरिका को भी स्वीकार नहीं है।
“अगर बहस प्रतिशत बढ़ोतरी की है — तो कुछ देशों ने वृद्धि नहीं की क्योंकि उन्होंने ईरान से तेल खरीद लिया है,” जयशंकर ने कहा।
“बाइडेन प्रशासन के साथ हमारी स्पष्ट बातचीत हुई थी, जिसके बाद प्राइस कैप सिस्टम अस्तित्व में आया था।”
3. भारत किसी भी बाहरी मध्यस्थता को नहीं स्वीकारता
जयशंकर ने यह भी दोहराया कि भारत अपनी पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय संबंधों में किसी भी बाहरी मध्यस्थता को नहीं स्वीकार करता।
“भारत सरकार का रुख स्पष्ट है: हम अपने द्विपक्षीय मामलों में किसी भी बाहरी मध्यस्थता को मान्यता नहीं देते।”
🌐 पृष्ठभूमि: क्यों बढ़ा टैरिफ विवाद
ट्रंप के इस निर्णय को भारत की रूस-यूक्रेन युद्ध पर तटस्थ स्थिति और रूसी ऊर्जा व्यापार जारी रखने की प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। यह टैरिफ एक तरह का दबाव बनाने का प्रयास है, जिससे भारत को अमेरिका के नेतृत्व वाले प्रतिबंधों के साथ लाने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि भारत ने हमेशा कहा है कि उसकी ऊर्जा आवश्यकताएं राष्ट्रीय हित से जुड़ी हैं, और उसका तेल व्यापार वैध, पारदर्शी और अंतरराष्ट्रीय कीमत सीमा (price cap) के तहत है।
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