कनाडाई सरकार ने माना: खालिस्तानी आतंकी समूहों को उसके देश से मिल रही है आर्थिक मदद
कनाडा सरकार की एक नई रिपोर्ट में पहली बार आधिकारिक रूप से स्वीकार किया गया है कि खालिस्तानी उग्रवादी संगठन कनाडा की धरती से अब भी चैरिटी, आपराधिक गतिविधियों और प्रवासी नेटवर्क के माध्यम से धन जुटा रहे हैं, जिसका इस्तेमाल राजनीतिक रूप से प्रेरित हिंसा के लिए किया जा रहा है।
यह खुलासा “2025 मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी फंडिंग जोखिम मूल्यांकन रिपोर्ट” में किया गया है, जिसे कनाडा के वित्त विभाग द्वारा जारी किया गया है।
🔍 रिपोर्ट की मुख्य बातें:
◼️ कनाडा की धरती से फंडिंग की पुष्टि:
रिपोर्ट में कहा गया है कि बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) और इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन (ISYF) जैसे खालिस्तानी उग्रवादी समूह अब भी कनाडा से धन प्राप्त कर रहे हैं। इसके अलावा, हमास और हिजबुल्ला जैसे आतंकी संगठनों को भी इसी श्रेणी में रखा गया है।

◼️ फंडिंग के स्रोत:
इन आतंकवादी संगठनों द्वारा फंडिंग के लिए जिन माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा है, उनमें शामिल हैं:
- चैरिटेबल डोनेशन (दान)
- गैर-लाभकारी संस्थाएं (NPOs)
- नशीले पदार्थों की तस्करी
- वाहन चोरी
- क्रिप्टोकरेंसी
- मनी सर्विस बिजनेस (MSBs)
- बैंकिंग सेक्टर का दुरुपयोग
◼️ राजनीतिक हिंसा को बढ़ावा:
रिपोर्ट के अनुसार, ये समूह पंजाब, भारत में एक स्वतंत्र खालिस्तान राज्य स्थापित करने के लिए हिंसात्मक तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
◼️ औपचारिक स्वीकृति पहली बार:
हालांकि कनाडा को खालिस्तानी अलगाववादी गतिविधियों का गढ़ माना जाता रहा है, यह पहला मौका है जब सरकार ने औपचारिक रूप से उनके संगठनात्मक ढांचे और आर्थिक गतिविधियों को मान्यता दी है।
🧩 छोटे समूहों में सिमटी गतिविधियाँ, लेकिन खतरा कायम
रिपोर्ट में कहा गया है कि पहले जहां खालिस्तानी संगठनों की व्यापक फंडिंग नेटवर्क मौजूद थी, अब वे छोटे–छोटे स्वतंत्र समूहों में बंट चुके हैं, जिनका किसी विशिष्ट संगठन से प्रत्यक्ष जुड़ाव नहीं है, लेकिन वे विचारधारा से अब भी जुड़े हुए हैं।
⚠️ चैरिटी और गैर–लाभकारी संस्थाओं के दुरुपयोग पर चिंता
रिपोर्ट में गैर-लाभकारी संगठनों (NPOs) के जरिए फंडिंग को लेकर विशेष चिंता जताई गई है। यह तरीका पहले हमास और हिजबुल्ला द्वारा अपनाया गया था, और अब खालिस्तानी समूहों द्वारा भी प्रवासी समुदायों से चंदा इकट्ठा करने और उसे आतंक गतिविधियों में लगाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अधिकतर कनाडाई NPOs से खतरा नहीं है, लेकिन कुछ खास संस्थाएं आतंक फंडिंग के लिए संवेदनशील हो सकती हैं, जिन्हें मामला–दर–मामला आधार पर जांचना आवश्यक है।
🧾 साक्ष्य पहले से मौजूद, लेकिन कार्रवाई सीमित
पिछले कई वर्षों से खालिस्तानी गतिविधियों के वीडियो, गवाहों के बयान और मीडिया रिपोर्ट्स सामने आती रही हैं, लेकिन कनाडा सरकार की ओर से इस पर ठोस कार्रवाई बेहद सीमित रही है। यह रिपोर्ट इस दिशा में नीतिगत बदलाव का संकेत हो सकती है, खासकर तब जब कनाडा पर अंतरराष्ट्रीय दबाव लगातार बढ़ रहा है।
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